lekhan vani

lekhan wah hota hai jisme takat hoti hai aur chetna jagti hai lekhak ke man me jo vichaar aata hai wah wahi likhta hai

110 Posts

326 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 8626 postid : 278

मीडिया में भ्रष्टाचार कहाँ तक सही

Posted On: 1 Nov, 2012 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

जिस देश के चौथे स्तम्भ से लोगों को आशा जमी रहती है जो खुलासे का काम करती है और जो राजनीतिज्ञों के भ्रष्टाचार के खुलासे करती है और जो राजनीतिक और आतंरिक नीतियों का पर्दाफाश करती है आज वो ही भ्रष्टाचार का दीमक खा रही है और आज उसे ही भ्रष्टाचार का दीमक लग गया है और आज मीडिया पर ही केस चल रहे हैं बड़ी हैरानी होती है यह देखकर की आज मीडिया में भी भ्रष्टाचार का दीमक लग गया है आजादी से पहले की पत्रकारिता बढ़िया थी तब पत्रकारिता बिकाऊ नहीं थी लेकिन आज तो पत्रकारिता भी बिक गयी है जब आजकल हमारे देश के नेता ही भ्रष्टाचार में लिप्त हैं तो मीडिया क्या नहीं होगी यह एक सोचने वाली बात है अभी भी मीडिया देश का चौथा स्तम्भ ही है इससे देश के लोगो को आशाएं जगी रहती हैं मीडिया को अब भ्रष्टाचार के मूल कारणों को खोजना चाहिए सोचना चाहिए की क्या कारण है जो अब हम भ्रष्टाचार में लिप्त है क्या येही देश के चौथे स्तम्भ का भविष्य है मीडिया भी अब बिकाऊ होता दिख रहा है बड़ी चिंता होती है यह देखकर की आज मीडिया भी बिक गया पत्रकारिता भी बिक गयी है पत्रकारिता के बिकने का मूल कारण है होड़ लगाना एक चैनल आजकल दुसरे चैनल से आगे बढ़ना चाह रहा है आजकल हर एक चैनल अपनी टी आर पि की दोड में है यहाँ तक की मीडिया में भी गन्दी चीजों को तवज्जो दी जाने लगी है गंदे गंदे विज्ञापन गलत गलत दृश्य यह सब क्यों दी जा रही हैं पैसो के खातिर और आजकल तो समाचार पत्र भी बिकते नजर आ रहे हैं समाचार पत्र भी आजकल रीडरशिप सर्वे के जरिये अपनी पाठक संख्या का हिसाब लगाता है और फिर विज्ञापन करता है इतने संस्करण इतने करोड़ पाठक और नंबर one यह तो समाचार पत्र की खूबी है और आजकल समाचार पत्र भी बढ़ा चढ़ाकर खबरें देते हैं जबकि समाचार पत्रों का काम है की सही खबरें दें आज़ादी से पहले के समाचार पत्र सही थे तब देश के चौथे स्तम्भ पर भ्रष्टाचार का दाग नहीं लगा था अरे आजकल के पत्रकार तो पत्रकारिता को पैसे कमाने का पेशा समझ रहे हैं जबकि पत्रकारिता पैसे कमाने का पेशा नहीं है वह तो देश को जगाने और देश की गतिविधियाँ निष्पक्ष देने का पेशा है पर आजकल तो पत्रकार भी बिक गए और मीडिया भी बिक गया आजकल के पत्रकारों को तो आजादी से पहले के पत्रकारों से प्रेरणा लेनी चाहिए तिलक जी ने केसरी अखबार निकाला उसमें आजादी की गतिविधियों के बारे में सही विवरण दिया और महात्मा गाँधी ने यंग इंडिया में ग्राम स्वराज पर लिखा देशबंधु चितरंजन जी ने सैनिक समाचार पत्र चलाया और उसमें आजादी पर ही लिखा वह भी निष्पक्ष देश की इज्जत पहले ही मिटटी में मिली है दुसरे देश के लोग हम पर हंस रहे हैं देश के प्रधानमन्त्री के उप्पर पहले ही भ्रष्टाचार को ख़त्म करने का भार है नेता भी भ्रस्ताचारी हैं हम दुसरे देश को क्या मुह दिखायेंगे क्या यह कहेंगे की देश का चौथा स्तम्भ भी भ्रष्टाचार में लिप्त है इसलिए मीडिया को अब भी जाग जाना चाहिए और अपने उप्पर भ्रष्टाचार का दामन हटाना चाहिए और निष्पक्ष पत्रकारिता में जुट जाना चाहिए और इमानदारी बरक़रार रखनी चाहिए और पैसो के हाथों बिकने से बचना चाहिए
धन्यवाद
लोकतान्त्रिक हित में अजय पाण्डेय द्वारा जारी

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

akraktale के द्वारा
November 2, 2012

अजय जी             सादर, देश कि रग रग में भ्रष्टाचार समाया हुआ है ऐसे में पत्रकारिता कैसे वंचित रह जाय. हाँ मगर यह बहुत ही दुखद है. 


topic of the week



latest from jagran